विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन बिल 2026 को विस्तृत समीक्षा के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में भारी हंगामे के बीच पास हो गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह प्रस्ताव सदन में रखा था।

जेपीसी (JPC) की संरचना और समयसीमा

  • इस 31 सदस्यीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल होंगे। [1]
  • समिति को आगामी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपनी होगी

विपक्ष का विरोध: कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल को वापस लेने की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि इसके प्रावधानों से गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है

सरकार का पक्ष: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह विधेयक पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष है और किसी भी धर्म या अल्पसंख्यक संस्था के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य विदेशी फंड के नियमन को मजबूत करना है

संसद के मानसून सत्र के दौरान हाल ही में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए धन की विनियोग से जुड़ा विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 पारित किया गया है, जिसे राज्यसभा ने चर्चा के बाद लोकसभा को लौटा दिया। इसके अलावा हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल और एंटी पेपर लीक (परीक्षा संशोधन) बिल जैसे महत्वपूर्ण विधेयक भी चर्चा का केंद्र रहे हैं

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