उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर सियासी और सामाजिक बहस के बीच तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए देशभर के मदरसों को बंद करने की मांग की है। परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि मदरसों से पढ़कर निकलने वाले लोगों में राष्ट्र विरोधी मानसिकता विकसित होती है और ऐसे संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
मदरसों को बंद करने की मांग
आईएएनएस से बातचीत में जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मदरसों में कामिल (ग्रेजुएशन) और फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएशन) की डिग्री पर रोक लगाने के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था।
परमहंस आचार्य ने कहा कि यदि किसी संस्थान में ऐसी शिक्षा दी जाती है, जहां लोगों का ब्रेनवॉश कर उन्हें राष्ट्र विरोधी मानसिकता की ओर प्रेरित किया जाता है, तो ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां से पढ़कर निकलने वाला व्यक्ति आगे चलकर पत्थरबाजी, आतंकवाद या देश विरोधी गतिविधियों की ओर बढ़ सकता है।
राष्ट्रवाद और देशभक्ति को लेकर लगाए आरोप
परमहंस आचार्य ने दावा किया कि कई धार्मिक संस्थानों में राष्ट्रवाद और देशभक्ति को विरोधी नजरिए से देखा जाता है। उनका कहना था कि ऐसे संस्थानों को जितनी जल्दी हो सके बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कामिल और फाजिल डिग्री पर रोक लगाने के फैसले का वह स्वागत करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि देश में चल रहे सभी मदरसों को बंद किया जाना चाहिए।
परमहंस आचार्य ने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लेखिका तसलीमा नसरीन के लेखन का हवाला देते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश के मदरसों के संबंध में जो बातें कही हैं, वह उनसे सहमत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मदरसे अमानवीय, राष्ट्र विरोधी और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले केंद्र बन चुके हैं।
क्या बोले थे केशव प्रसाद मौर्य
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि मदरसा शिक्षा से कई बड़े आतंकवादी निकले हैं, जिन्होंने भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐसी शिक्षा का परिणाम है।
केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि मदरसा शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग “भारत माता की जय” नहीं बोलते, “वंदे मातरम” नहीं गाते और उनकी सोच आतंकवाद की ओर झुक जाती है।






