बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने खुद को गर्व से ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक बहस छिड़ गई है।
यह पूरा मामला दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़ा है।
1. नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा?
28 अक्टूबर 2026 को नसीरुद्दीन शाह ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ लिखा हुआ बैज भी दिखाया।
उन्होंने कहा:
“मैं फख्र के साथ कहता हूं कि मैं दिमागी नक्सल हूं। मुझे नहीं मालूम कि मेरे जैसे लोगों को चौकीदार ने और कौन-कौन से नाम दिए हैं। एंटी नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और न जाने क्या-क्या।”
उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं का मनोबल तोड़ने, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने और लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए सरकार आखिर और कितना आगे जाएगी।
शाह ने यह भी कहा कि अगर देश में कोई असली ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ है तो वह मौजूदा सरकार है।
जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के समर्थन में उतरे शाह
दरअसल, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र लंबे समय से छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
- छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित की जाए।
- छात्र संघ चुनाव 2006 से नहीं हुए हैं।
- प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव कराने की स्पष्ट समयसीमा चाहते हैं।
- शाह ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और उनके साथ हो रहे कथित अन्याय पर सवाल उठाए।
शाह ने अपने वीडियो में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया का भी जिक्र किया।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह के बयान पर नाराजगी जताई।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अभिनेता की आलोचना करते हुए उन्हें खतरनाक अर्बन दिमागी नक्सल बताया।
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी किया हमला
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी शाह के बयान की आलोचना की।
उन्होंने शाह पर पाकिस्तान के समर्थन में बोलने का आरोप लगाया और उनके बयान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। हालांकि ये उनके व्यक्तिगत राजनीतिक आरोप हैं, स्थापित तथ्य नहीं।
- नसीरुद्दीन शाह का पक्ष: उनका कहना है कि युवाओं, शिक्षा संस्थानों और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना जरूरी है।
- आलोचकों का पक्ष: उनके विरोधियों का कहना है कि वह सरकार की आलोचना चुनिंदा तरीके से करते हैं और उनके विचार एकतरफा हैं।
फिलहाल इस बयान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्र राजनीति, शिक्षा व्यवस्था और सरकार की आलोचना जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।
नोट: यह खबर 28-29 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसमें नेताओं और कलाकारों की टिप्पणियां उनके अपने बयान और आरोप हैं।
नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था?
पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब नसीरुद्दीन शाह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो संदेश शेयर किया. इस वीडियो में उन्होंने कहा था, “मैं फख्र के साथ कहता हूं कि मैं दिमागी नक्सल हूं. मुझ जैसे लोगों को एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और न जाने क्या-क्या नाम दिए हैं. अगर इस देश में कोई असली टुकड़े-टुकड़े गैंग है, तो ये हुकूमत है.”






