मणिपुर के CM वाई. खेमचंद सिंह ने इस दोनों घटनाओं में मारे गए लोगों के प्रति दुख जताया और कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा पूरी तरह से कायरता है. ऐसी घिनौनी हरकत बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में उग्रवादी हमले पूरी तरह से थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. राज्य के तामेंगलोंग और नोनी जिलों में रविवार (13 सितंबर, 2026) को दो अलग-अलग संदिग्ध उग्रवादियों के हमलों में दो महिला समेत कम से कम चार लोगों की मौत हो गई.
स्थानीय पुलिस ने बताया कि तामेंगलोंग में उग्रवादी हमले को रविवार तड़के करीब चार बजे अंजाम दिया गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दूसरी घटना पहली वारदात से करीब 12 घंटे के बाद घटी और इस वारदात में भी दो लोगों की जान चली गई.
लॉन्गपी में दो और कुकी नागरिकों की हत्या
टोलन की घटना के बाद नोनी जिले के लॉन्गपी कुकी गांव में भी हमला हुआ। कुकी संगठन कोटू के मुताबिक, यहां सेम्पाट गांव के रहने वाले थांगवेल गांगते और जूली गांगते की हत्या कर दी गई। एक अन्य महिला के लापता होने की भी सूचना है। संगठन ने दोनों घटनाओं में एनएससीएन-आईएम और जेडयूएफ (के) की कथित भूमिका की जांच की मांग की है।
कुकी इनपी जिरी, तामेंगलोंग और नोनी ने कहा कि टोलन में गोलीबारी केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती वाली जगह से कुछ ही दूरी पर हुई। संगठन ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने और टोलन में स्थायी सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की है।
संगठन ने सरकार को 24 घंटे का समय देते हुए कहा है कि ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी और उसके बाद अनिश्चितकालीन पूर्ण बंद किया जाएगा। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि न्याय सुनिश्चित होने तक मृतकों के शव अंतिम संस्कार के लिए स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
ताजा घटनाएं ऐसे समय हुई हैं, जब कुकी समुदाय रविवार को ‘साहनित नी’ यानी कुकी ब्लैक डे के रूप में 1990 के दशक के संघर्ष में मारे गए लोगों को याद कर रहा था। एक ही दिन में चार हत्याओं से मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में तनाव और सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है।






