ठंड शुरू होते ही प्रदूषण की मार झेल रही राजधानी दिल्ली की शनिवार की सुबह हवा में हल्का सुधार देखने को मिला। दिल्ली में आज सुबह एम्स के आसपास के इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 179 दर्ज किया गया, जबकि दिल्ली में शुक्रवार को राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 230 दर्ज किया गया था, जो खराब श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली में शनिवार को एम्स के आसपास का एक्यूआई 179 रिकॉर्ड किया गया है, जो कि मध्यम श्रेणी में आता है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण से फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 9 दिन तक हवा की गुणवत्ता में खास सुधार की संभावना नहीं है।
हवा खराब श्रेणी में रहने का अनुमान
26 अक्टूबर तक हवा खराब श्रेणी में रहने का अनुमान है, जबकि इसके बाद के छह दिनों में भी स्थिति लगभग ऐसी ही बनी रह सकती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के समीर एप के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 56 निगरानी केंद्रों में से तीन पर वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई। इनमें पूसा में सबसे अधिक 324 एक्यूआई रहा। वहीं, 36 केंद्रों पर हवा “खराब” और 17 केंद्रों पर मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई
वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, पराली जलाना और त्योहारों के दौरान आतिशबाजी प्रदूषण के स्तर को बढ़ाते हैं। नतीजतन, बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और खुले में काम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर इसका घातक प्रभाव पड़ता है। स्मॉग के चलते रेल, सड़क एवं वायु यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान होता है। इन सबका असर देश के आर्थिक विकास पर भी पड़ता है। इसलिए, इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी है कि सरकारें केवल प्रदूषण का स्तर खतरनाक होने पर सक्रिय होने के बजाय पूरे साल प्रभावी कदम उठाएं।






