चुनाव के दिन हम ‘मालिक’ होते हैं, और अगले दिन से ‘मजबूर’। क्या ये 5 साल का इंतज़ार वाकई लोकतंत्र है या सिर्फ़ हमारी मज़बूरी?
राज्यसभा में राघव चड्ढा ने एक ऐसी माँग उठाई है जो देश के हर वोटर के दिल की गहरी टीस है। उनका तर्क सीधा और बेहद सटीक है— अगर जनता किसी नेता को चुन सकती है, तो काम न करने पर उसे हटाने का हक भी जनता के पास ही होना चाहिए।
आज हमारे पास ‘Right to Elect’ तो है, लेकिन अगर हमारा प्रतिनिधि अपने वादों से मुकर जाए या भ्रष्टाचार में डूब जाए, तो हम असहाय होकर अगले चुनाव का इंतज़ार करते हैं। ज़रा सोचिये, अगर हम देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और जजों को पद से हटा सकते हैं, तो एक सांसद या विधायक को 5 साल तक मनमानी करने की ‘खुली छूट’ क्यों मिले? ![]()
दुनिया में ऐसा कोई प्रोफेशन नहीं है जहाँ आप 5 साल तक खराब प्रदर्शन करें और आपको कोई हाथ भी न लगा सके। अमेरिका और स्विट्जरलैंड जैसे 24 से ज़्यादा मज़बूत लोकतंत्रों में ‘Right to Recall’ का कानून पहले से मौजूद है। अगर वहाँ के नागरिक अपने प्रतिनिधियों को जवाबदेह बना सकते हैं, तो भारतीय वोटर्स को इस ताक़त से दूर क्यों रखा गया है?
बेशक, इस अधिकार का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए राघव चड्ढा ने 4 मज़बूत सुरक्षा कवच (Safeguards) भी सुझाए हैं:
लॉकिंग पीरियड: चुनाव के शुरुआती 18 महीनों तक इसे लागू न किया जाए, ताकि नेता को अपना काम साबित करने का पूरा मौका मिले।
जन समर्थन: कम से कम 35% से 40% वोटर्स एक ‘वेरिफाइड पिटीशन’ के ज़रिए इसकी माँग करें।
ठोस आधार: यह सिर्फ राजनीतिक विरोध के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार या काम में बड़ी लापरवाही के आधार पर ही हो।
अंतिम फैसला: नेता तभी हटे जब 50% से ज़्यादा जनता दोबारा होने वाली वोटिंग में उसे हटाने का समर्थन करे।
यह कानून नेताओं के मन में ‘जनता का डर’ पैदा करेगा। पार्टियों को मज़बूर होना पड़ेगा कि वे दागी और कामचोर चेहरों को नहीं, बल्कि काम करने वाले ‘परफॉर्मर्स’ को ही टिकट दें।
लोकतंत्र का असली मतलब सिर्फ़ एक दिन बटन दबाना नहीं, बल्कि उस वोट की ताक़त को पूरे 5 साल तक कायम रखना है। वोटर्स को नेता चुनने का हक है, तो उसे कुर्सी से उतारने का हक भी मिलना ही चाहिए।
“क्या आपको भी लगता है कि ‘Right to Recall’ आने के बाद ही नेता जनता को गंभीरता से लेना शुरू करेंगे? क्या 5 साल की यह बेबसी अब खत्म होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट्स में बेबाकी से साझा करें।”






