इजराइल में 90 प्रतिशत से ज्यादा वोटों की गिनती पूरी हो गई है। इसके बाद भी सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट, दोनों के गठबंधन बहुमत से दूर हैं।
इजराइली संसद में 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटें चाहिए। हालांकि, नेतन्याहू इससे कम सीटें होने पर भी सरकार बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें 19 सीटों के साथ किंगमेकर बनकर उभरी अरब पार्टियों की जरूरत भी नहीं है।
नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे गादी आइजनकोट गठबंधन की उम्मीदें भी कायम हैं। 48 सीटों में आगे चल रहे इस गठबंधन के पास सरकार बनाने के 3 रास्ते हैं।
नेतन्याहू विपक्षी गठबंधन में शामिल किसी पार्टी या उसके कुछ सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव देने या उनकी कुछ मांगें मानने की जरूरत पड़ सकती है। अगर विपक्षी खेमे के कुछ सांसद विश्वास मत में नेतन्याहू का समर्थन करते हैं या मतदान से दूर रहते हैं, तो उनके लिए सरकार बनाने का रास्ता आसान हो सकता है।
हालांकि, विपक्षी नेताओं ने चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का लक्ष्य रखा था। इसलिए उनके किसी सहयोगी का नेतन्याहू के पक्ष में जाना राजनीतिक रूप से मुश्किल हो सकता है। अभी किसी खास विपक्षी नेता के पाला बदलने की पुष्टि नहीं हुई है।
2. राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना
नेतन्याहू दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं। इसमें उनके मौजूदा दक्षिणपंथी और धार्मिक सहयोगियों के साथ विपक्ष के कुछ नेता भी शामिल हो सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट या गादी आइजनकोट जैसे नेताओं की भूमिका इस विकल्प में अहम हो सकती है।
लेकिन इसके लिए प्रधानमंत्री पद, सैन्य सेवा से जुड़े नियमों और दूसरी नीतियों पर समझौता करना होगा। आइजनकोट और नेतन्याहू के बीच राजनीतिक मतभेद इस रास्ते की बड़ी बाधा हैं। इसके अलावा, नेतन्याहू के अति-दक्षिणपंथी सहयोगियों को भी विपक्षी नेताओं के साथ सत्ता साझा करना मंजूर होना जरूरी नहीं है।
3. अल्पमत सरकार चलाना
तीसरा विकल्प ऐसी सरकार बनाना है, जिसके पास अपने गठबंधन में 61 सीटें न हों, लेकिन वह विश्वास मत हासिल कर ले। इसके लिए जरूरी नहीं कि अरब पार्टियां सरकार में शामिल हों। यदि वे मतदान से दूर रहती हैं या सरकार के खिलाफ वोट नहीं देतीं, तो संसद में मौजूद और वोट करने वाले सांसदों के हिसाब से सरकार विश्वास मत जीत सकती है।
हालांकि, यह विकल्प सरकार को स्थिरता की गारंटी नहीं देता। बजट, कानून और दूसरे बड़े फैसलों के लिए नेतन्याहू को संसद में समर्थन जुटाना होगा। अगर विरोधी दल एकजुट होकर सरकार के खिलाफ वोट करते हैं, तो उनकी सरकार संकट में पड़ सकती है।
सीटों का पूरा गणित क्या है?
इस्राइल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, किसी भी गठबंधन के पास फिलहाल सरकार बनाने लायक सीटें नहीं हैं।
- लिकुड पार्टी: नेतन्याहू की पार्टी 27 सीटों के साथ संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
- नेतन्याहू का गठबंधन: दक्षिणपंथी गठबंधन को कुल 53 सीटें मिली हैं, जो बहुमत से आठ कम हैं।
- विपक्षी खेमा: नेतन्याहू को हटाने की कोशिश कर रहे दलों को कुल 48 सीटें मिली हैं।
- अरब पार्टियां: इन दलों ने मिलकर 19 सीटें हासिल की हैं। सरकार बनाने के गणित में इनकी भूमिका अहम है।
- बहुमत का आंकड़ा: इस्राइल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।
- अन्य प्रमुख दल: यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म और ओत्जमा येहुदित को सात-सात, जबकि शास और धार्मिक जायनिस्ट पार्टी को छह-छह सीटें मिली हैं।
- एकता सरकार का विकल्प: लिकुड, यशर, टुगेदर और यिसरायल बेतेनु साथ आते हैं तो कुल 66 सीटें हो सकती हैं।
मंसूर अब्बास को अल्पमत सरकार बनने की उम्मीद क्यों नहीं है?
अरब दलों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने की संभावना पर राम पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास ने संदेह जताया है। चैनल 12 न्यूज के हवाले से द टाइम्स ऑफ इस्राइल ने बताया कि अब्बास ने पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक में कहा कि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व में अरब दलों के बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनना मुश्किल है। दरअसल, विपक्षी खेमे के ज्यादातर दल अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं, एकता सरकार का विकल्प भी सामने है, जिसमें नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और विपक्षी दल साथ आ सकते हैं। हालांकि, विपक्ष पहले ही नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के वादे के साथ चुनाव लड़ चुका है। ऐसे में उनके साथ सरकार बनाने का रास्ता आसान नहीं है।






