वॉशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान युद्ध का उनकी रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार में योगदान रहा, लेकिन उन्होंने सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव किया।
4 नवंबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी था और अगर उन्हें दोबारा ऐसा फैसला लेना पड़े तो वह फिर यही करेंगे।
उन्होंने माना कि युद्ध के आर्थिक प्रभावों से अमेरिकी मतदाता नाराज थे। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह ऐसा कदम था, जिसे उठाना जरूरी था और अमेरिका आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा।
ट्रंप ने युद्ध को लेकर उठ रहे सवालों के बीच रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को पद से हटाने की संभावना भी खारिज कर दी। ट्रंप ने कहा कि हेगसेथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। चुनाव में हार के बाद ट्रंप के तेवरों में कुछ नरमी भी देखने को मिली।
उन्होंने डेमोक्रेट्स को जीत की बधाई देते हुए उनके साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। सीबीएस न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह देश की भलाई के लिए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद रखते हैं।
वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में उन्होंने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने की बात कही। हालांकि, ट्रंप जल्द ही अपने पुराने आक्रामक अंदाज में लौट आए। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए खुद के चुनाव मैदान में नहीं होने को भी एक वजह बताया।
साथ ही चेतावनी दी कि डेमोक्रेट्स के ऐसे विधेयकों को राष्ट्रपति के वीटो अधिकार से रोक दिया जाएगा, जिनसे वह सहमत नहीं होंगे।
उधर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के पीछे ईरान युद्ध को प्रमुख कारण बताया। चुनावी नतीजों के बाद यह साफ हो गया है कि महंगाई और विदेश नीति से जुड़े फैसले ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गए हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में हार के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के फैसले से पीछे हटते नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें बढ़ने और चुनावी नुकसान होने की बात स्वीकार की है, लेकिन परमाणु हथियारों के मुद्दे को अपनी कार्रवाई का मुख्य कारण बताया है।
