सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले छात्रों को यह जानना बेहद ज़रूरी है कि एक ईमानदार और निडर IPS अधिकारी का असर कितना गहरा होता है। इसी की मिसाल हैं IPS डी रूपा, जिन्हें देश की सबसे कड़क और बहादुर अफसरों में गिना जाता है।
कर्नाटक की रहने वाली डी रूपा ने कुवेम्पु यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और गोल्ड मेडल हासिल किया। साल 2000 में उन्होंने UPSC परीक्षा में 43वीं रैंक पाई और पुलिस ट्रेनिंग में भी पांचवाँ स्थान हासिल किया।
उनका करियर संघर्ष और साहस से भरा रहा। 20 साल की नौकरी में 40 बार तबादले हुए, लेकिन उन्होंने कभी अपने कर्तव्यों से समझौता नहीं किया।
सबसे बड़ा मोड़ आया जब साल 2007 में उन्होंने मध्य प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती को कोर्ट आदेश पर गिरफ्तार किया। यह कदम बेहद साहसिक था और यह साबित करता है कि कानून सबके लिए बराबर है।
IPS डी रूपा की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे हैं। यह सिखाती है कि ईमानदारी, साहस और कर्तव्यपरायणता से कोई भी अधिकारी इतिहास रच सकता है।