भारत पर अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ (शुल्क) थोपे जाने के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यापार दबाव या जबरदस्ती के आधार पर नहीं, बल्कि आपसी सहमति और स्वेच्छा से होना चाहिए. भागवत ने इस मौके पर आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता को दोहराते हुए स्वदेशी के महत्व पर बल दिया. उन्होंने कहा कि भारत को अब ऐसी नीतियां अपनानी होंगी जो देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं और वैश्विक चुनौतियों का डटकर सामना करने में सक्षम बनाएं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिकी टैरिफ के बाद स्वदेशी के लिए पहल करने की अपील की और सरकार को सलाह दी कि किसी के उकसावे में न आएं। भागवत ने ट्रंप को भी नसीहत देते हुए कहा कि दबाव में व्यापार नहीं किया जाता।
दरअसल भागवत नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने लोगों से बाहर के बने उत्पादों की बजाय घर के बने पेय और खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करने की अपील की।