चुनाव के दिन हम ‘मालिक’ होते हैं, और अगले दिन से ‘मजबूर’। क्या ये 5 साल का इंतज़ार वाकई लोकतंत्र है या सिर्फ़ हमारी मज़बूरी?12/02/2026