राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगा है। सोमवार सुबह दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई। आसमान में धुंध और स्मॉग की मोटी परत दिखाई दी, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
1. कितना बढ़ा दिल्ली का AQI?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार:
- रविवार 1 नवंबर: औसत AQI 261।
- सोमवार 2 नवंबर सुबह 7 बजे: AQI 307।
- सोमवार सुबह 8 बजे: AQI लगभग 310
प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:
- पराली जलाना: पंजाब और हरियाणा में खेतों में पराली जलाने से धुआं बढ़ रहा है।
- वाहनों का धुआं: बड़ी संख्या में चलने वाली गाड़ियों से प्रदूषण फैल रहा है।
- निर्माण कार्य: सड़कों और इमारतों के निर्माण से धूल उड़ रही है।
- मौसम में बदलाव: हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक वातावरण में जमा हो रहे हैं।
- दीपावली की तैयारी: पटाखों से होने वाले संभावित प्रदूषण को लेकर भी चिंता है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए सर्दियों की प्रदूषण नियंत्रण योजना लागू की गई है।
- BS-VI से कम मानक वाले बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध।
- धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर रोक।
- निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय।
- सरकारी और निजी कार्यालयों में 50% कर्मचारियों की उपस्थिति तथा वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था।
खराब हवा के कारण लोगों को ये परेशानियां हो सकती हैं:
- सांस लेने में तकलीफ।
- आंखों में जलन।
- खांसी और गले में खराश।
- अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ना।
- बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर।
6. लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
- सुबह और शाम बाहर व्यायाम करने से बचें।
- जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें।
- घर के अंदर खिड़कियां बंद रखें, जब बाहर प्रदूषण ज्यादा हो।
- बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा प्रदूषित जगहों पर न ले जाएं।
- सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
7. आगे मौसम कैसा रहेगा?
मौसम और वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक प्रदूषण खराब श्रेणी में रह सकता है और कुछ समय में बेहद खराब स्तर तक पहुंच सकता है।
दिल्ली में प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। रविवार को AQI 261 था, जो सोमवार सुबह 300 के पार पहुंच गया। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
